जागेश्वर (अल्मोड़ा)।
बिबड़ी गांव के कास्तकार पिछले कई वर्षों से सिंचाई के पानी के लिए परेशान हैं। वर्ष 1980-81 में करोड़ों की लागत से बनी बिबड़ी नहर अब पूरी तरह से बंद पड़ी है। किसानों की फसलें सूखने की कगार पर हैं और आगामी गेहूं बुवाई से पहले खेतों में पानी का संकट गहराता जा रहा है।
बुधवार को दैवीय आपदा में क्षतिग्रस्त नहर का निरीक्षण करने पहुँची सिंचाई विभाग की टीम को ग्रामीणों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा। टीम में सिंचाई उपखंड दन्या के एई विशाल प्रसाद, जेई जीवेश वर्मा और सींच पर्यवेक्षक बलवंत सिंह शामिल थे। कास्तकार मोहन चंद्र जोशी, पूर्व ग्राम प्रधान गोपाल दत्त जोशी, किसन जोशी, नंदा बल्लभ सहित कई किसानों ने कहा कि “25 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई के लिए बनी नहर कई वर्षों से बंद है, लेकिन कोई हमारी सुनवाई नहीं करता।”
धूराटांक ग्राम प्रधान सुरेश चंद्र जोशी और कोला ग्राम प्रधान बसंत बल्लभ जोशी ने भी किसानों की ओर से जल्द पानी उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कास्तकारों को हर साल सिंचाई के लिए विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता। सिंचाई उपखंड दन्या के एई विशाल प्रसाद ने बताया कि 2018-19 में खेती–जटेश्वर मोटर मार्ग बनने के दौरान नहर क्षतिग्रस्त हो गई थी। विभाग ने 2021-22 में पीडब्ल्यूडी को क्षति का प्राकलन भेजा था, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि “हम फिर से रिपोर्ट की प्रतिलिपियाँ पीडब्ल्यूडी को भेजेंगे ताकि जल्द कार्यवाही हो सके।”
वहीं, लोक निर्माण विभाग के एई आलोक ओली ने बताया कि उन्हें हाल ही में नया चार्ज मिला है, इसलिए खेती–जटेश्वर मार्ग से संबंधित जानकारी की समीक्षा के बाद ही कोई टिप्पणी की जा सकेगी।